मंगलवार, 26 मार्च 2019

स्त्री और पुरुष के रिश्ते सिर्फ प्यार से ही टिकाऊं रह सकते हैं

#स्त्री_और_पुरुष_के_रिश्ते_सिर्फ_प्यार_से_ही_टिकाऊं_
#रह #सकते_हैं
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एक जवान औरत और मर्द के बीच नि:स्वार्थ प्रेम जैसा कोई रिश्ता नहीं होता, यह रिश्ता तो उम्र के पचासवें बसंत से शुरू होता है जहां जिस्म नहीं, भावनाएं अहम हो जाती हैं, एक-दूजे का इंसान ख्याल रखने लगता है। यह भी वहीं होता है जहां जिंदगी के पच्चीस-तीस साल साथ गुजर कर दोनों जोड़े एक साथ पचासवें बसंत में कदम रखे हों। जिन दो जवां दिलों में नि:स्वार्थ प्रेम की बात की जाती है उनमें किसी कारणवश एक दूसरे का साथ न मिल पाने से नि:स्वार्थ प्रेम की बातें होती हैं। ठीक अंगूर खट्टे हैं वाली कहावत की तरह। अगर जवां दिलों में प्यार परवान चढ़ता है तो समाज की सारी बंदिशें तोड़ प्रेमी सभी हदें लांघ जाते हैं बिना आगा-पीछा सोचे। स्त्री और पुरुष का मिलन आग और घी का मिलन है यह बात पुरुष महिलाएं
 जानते हैं। सभ्यता की मांग यह कि सभी अपने जज्बात सभी के साथ नहीं शेयर करते। डरते हैं कि क्या पता मुंह की खानी पड़े। जहां प्रेम प्रगाढ़ हो जाता है तो क्या शादीशुदा क्या क्वांरे परिणाम एक जैसा ही निकलता है वे सबकुछ भूल एक-दूसरे के हो जाते हैं। आपसी रिश्तों का सामंजस्य न बैठा पाने की वजह से आज रिश्ते दरक रहे हैं, अपना मूल्य खोते जा रहे हैं, परिवार विघटन के कगार पर खड़ा है।
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जिन लोगों को अपने परिवार अपने जिम्मेदारियों का एहसास है वे परिवार के लिए जी रहे हैं, उन्हीं में अपनी खुशियां तलाश रहे हैं। बच्चों की सफलता, पत्नी के चेहरे की हंसी में ही उन्हें संतोष मिल रहा। इन तमाम कारणों के लिए पति और पत्नी दोनों जिम्मेदार हैं। औरत और मर्द के रिश्ते में बड़ी साफगोई से बताना चाहता हूं कि दोनों का एक-दूसरे की ओर आकर्षित होना बेहद नेचुरल, बहुत प्राकृतिक है। मनुष्य ने अपनी सभ्यता विकसित कर इसे रिश्तों का जामा पहनाया है। इसकी हदें तय कर दी हैं। इस पर सामाजिक ताना-बाना बुना है। पर यह हदें जब टूटती हैं तो समाज में इसे लेकर कड़ी प्रतिक्रिया होती है जो काफी हद तक सही भी है। लेकिन यह रिश्ता समाज का नहीं औरत और मर्द का है, इंसान का इंसान से है, दिल का दिल से है इसे प्यार से सींचकर ही व्यवस्थित रखा जा सकता है। प्यार से ही यह उर्वरक रहेगा, प्यार ही इसके लिए खाद पानी है। प्यार नहीं मिला तो यह मुरझा सकता है, टूट सकता है, सूख सकता है। इसलिए हर स्त्री और पुरुष को जो परिवार बनकर साथ रह रहे हैं इसे प्यार से सींचें....रहिमन धागा प्रेम का मत तोड़ो चटकाय....🙏

सोमवार, 25 मार्च 2019

देश की महिलाओं पर बेहूदे कमेंट से बाज आए जनता

#औरत_ही_मर्द_पैदा_करती_है, #मर्द_पैदा_होकर_उस_पर #टिप्पड़ियां_करने_से_बाज_आएं
#सपना_चौधरी_प्रकरण
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दोस्तों भूखे पेट रहकर परिवार का पेट पालना कोई सपना चौधरी से सीखे, आज सपना को सभी बड़े दल अपनी पार्टी का टिकट देनें को आतुर हैं, यह यूं ही नहीं हुआ। 1990 में हरियाणा रोहतक के  साधारण परिवार में जन्मी सपना चौधरी के पिता एक निजी कंपनी कर्मचारी थे। 2008 में ही पिता के देहांत के बाद सपना पर परिवार चलाने की जिम्मेदारी आ पड़ी तब वह महज 18 साल की थी।पिता की मृत्यु के बाद सपना ने परिवार की जिम्मेदारियों के लिए नृत्य और गायन को अपना व्यवसाय बना लिया और इस कला के माध्यम से उसने पैसे शोहरत की बुलंदियों को छुआ।सपना ने अपने करियर की शुरुआत हरियाणा के एक ऑर्केस्ट्रा टीम के साथ की फिर रागनी कलाकारों के साथ टीम का हिस्सा बनकर की प्रोग्राम दिए।हरियाणा में और आस पास के राज्यों में रागनी प्रोग्रामो में रागनी पार्टियों के साथ हिस्सा लेती रही, उसके बाद  स्टेज डांस करना शुरू किया
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देश की अन्य औरतों की तरह ही सपना के उपर भी जुल्म कम नहीं हुए। 2016 में गुड़गांव में आयोजित एक कार्यक्रम में सपना चौधरी द्वारा गाए एक रागनी  के गीत पर आपत्ति दर्ज कराते हुए दलितसंगठन बहुजन आजाद मोर्चा के अध्यक्ष सतपाल तंवर ने सपना के खिलाफ हिसार में प्राथमिकी दर्ज करा दी। इसके अलावा सपना चौधरी के विरुद्ध गुड़गांव में ​सेक्टर-29 के थाने में एफआईआर दर्ज हुआ। जिस पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सपना के खिलाफ एससी एसटी एक्ट के साथ साथ भारतीय दण्ड संहिता की धारा 34 के अंतर्गत मामला दर्ज किया। मामले की जांच-पड़ताल के लिए एक एसआईटी टीम का भी गठन कर दिया गया। मामले में सपना ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगीा।  माफी मांगने के बाद भी सोशल मीडिया साईट पर दलित संगठनों द्वारा उनके खिलाफ अभियान छेड़ा गया था। जिस पर लगातार उनके खिलाफ बहुत आपत्तिजनक टिप्पणियां की जा रही थीं। इन सब से तंग आ कर सपना ने ख़ुदकुशी करने की कोशिश तक की।
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सपना आज जो कुछ भी है अपनी बदौलत है। पूरे देश में सपना की ख्याति है। वह किसी परिचय की मोहताज नहीं है, सारा देश उसे जानता है। हरियाणा की यदि किसी गायिका ने अपने गाने के दम पर देश की जनता के दिलों पर राज किया है तो वह एकमात्र नाम सपना चौधरी का है। उसके गाने व डांस पर हर आयु वर्ग के लोग झूमते हैं। सपना ने 20 से अधिक गानों में अपनी आवाज दी है। सपना ने जर्नी ऑफ भांगओवर में आइटम नंबर से बॉलीवुड में डेब्यू किया। इसके बाद सपना वीरे की वेडिंग फिल्म के सॉन्ग 'हट जा ताऊ' में नजर आई थीं। वहीं अभय देयोल स्टारर फिल्म नानू की जानू में सपना ने अहम किरदार निभाया और 'तेरे ठुमके सपना चौधरी' नामक एक आइटम नंबर भी किया है। सपना ने यह सब किया परिवार चलाने के लिए।  क्या परिवार चलाने के लिए मेहनत करना अपराध है। कोई नाते-रिश्तेदार काम नहीं आया। इस दुनिया में यह सब सपना ने नाम, दौलत, शोहरत अपनी मेहनत से कमाया है, किसी कमज़र्फ को यह हक नहीं है कि सपना पर अश्लील फब्तियां कसे। और सपना पर ही क्यों देश की किसी महिला पर कोई क्यों कमेंट कसे?????
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कांग्रेस में जाने की बात सुनकर बीजेपी समर्थकों ने
सपना पर जो फब्तियां कसी, कमेंट किए उन्होंने यह कमेंट सपना पर नहीं देश की नारी अस्मिता और गौरव पर किया, उन्होंने सभी पुरुष समाज को कलंकित किया, उन्होंने यह बताया कि उनकी नजर में देश की औरत क्या मायने रखती है, उन्होंने यह बताया कि उनका चरित्र कैसा है और उनकाे संस्कार कैसा मिला है, उन तमाम लोगों के साथ सबसे गंदा और घृणित बयान यूपी के बीजेपी विधायक सुरेंद्र सिंह का है। समाचार एजेंसी एएनआई को सुरेंद्र सिंह ने कहा कि 'राहुल जी भी अपनी कुल परंपरा को आगे बढ़ाएं यह अच्छी बात है, उनकी माता जी भी इटली में इसी पेशे से थीं, आज उन्होंने सपना को भी अपना बना लिया. मैं तो धन्यवाद दूंगा राहुल जी को कि जैसे आपके पिता जी ने सोनिया गांधी को अपना बना लिया, आप भी आज भारत की राजनीति में सपना को अपना बनाकर राजनीति की नई पारी की शुरुआत करें. इसके लिए आपको साधुवाद।
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मैं पूछता हूं क्या किसी महिला के किसी  पार्टी को ज्वाइन करने का मतलब उसे अपना बना लेना होता है?मैं यहां किसी महिला का अपमान नहीं करना चाहता पर यह जरूर पूछना चाहता हूं कि दूसरी पार्टियों में जो महिलाएं गई हैं क्या पार्टी नेताओं ने उसे अपना बना लिया है। महिलाओं पर फब्तियां कसना संवैधानिक जुर्म भी है। उस देश में जहां अपने देश को भारत #माता मादरे वतन कहकर बुलाया जाता है और देश की मिट्टी को मां के गोंद की संज्ञा मिली है। वहां औरत का इस तरह से अपमान असहनीय और धिक्कारने वाला है। चाहे मायावती हों,ममता हों, महबूबा हों, सोनिया, हों, प्रियंका हों, समृति इरानी हों या सपना चौधरी सभी महिलाएं आदरणीय हैं। भारतीय पित्रात्मक सत्ता में महिलाएं इस सोच से महफूज नहीं रह पाएंगी। सोच बदलनी होगी, क्योंकि यह पूरे राष्ट्र के औरतों की अस्मिता का प्रश्न है। हम यह अच्छी तरह जान लें औरत वह है जो मर्द पैदा करती है। प्लीज उसी से पैदा होकर उसे गाली तो न दें, भद्दे कमेंट मत करें, तल्ख टिप्पड़ियों से बख्शें उसे.... 🙏

रविवार, 24 मार्च 2019

पाकिस्तान में हिंदु लड़कियों का हुआ जबरन धर्मांतरण

पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदुओं को समानता का अधिकार देने की बात करने वाले इमरान खान दो नाबालिंग हिंदू लड़कियों के जबरन अगवा करा धर्मांतरण कर इस्लाम स्वीकार कराने के मामले पर मौन साध लिए हैं।
होली की पूर्व संध्या पर पाकिस्तान के सिंध प्रांत में दो नाबालिग हिंदू लड़कियों को दबंग मुस्लिमों द्वारा जबरन अगवा कर उनका धर्मांतरण कराकर इस्लाम स्वीकार कराने का मामला सामने आया है। आलम यह है कि अभी तक इस मामले में एफआईआर तक दर्ज नहीं हुई है। लड़कियों का पिता अपनी लड़कियों की वापसी को लेकर बदहवासी के आलम में छाती पीट-पीट पाकिस्तानी सैनिकों से खुद को गोली मार देने को कह रहा है। इस मामले में दो विडियो सामने आए हैं जिनमें एक में काजी कह रहा कि लड़कियों ने अपनी मर्जी से धर्म परिवर्तन कराया है जबकि दूसरे वीडियो में लड़कियों ने अपने ऊपर होने वाले अत्याचार के बारे में बताया है। लड़कियों का कहना है कि उन्हें छेड़ा जा रहा उनके साथ मारपीट की जा रही है, वह घर जाना चाहती हैं उन्हें जाने नहीं दिया जा रहा है...
मामले में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इस घटना के संबंध में मीडिया की रिपोर्ट संलग्न करते हुए ट्वीट किया कि उन्होंने पाकिस्तान में भारतीय उच्चायुक्त से इस मामले पर रिपोर्ट भेजने को कहा है।
सुषमा स्वराज के इस ट्विट पर इस पर पाकिस्तान के सूचना मंत्री चौधरी फ़वाद हुसैन ने भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को लिखा कि यह पाकिस्तान का आंतरिक मामला है और हमारे लिए अल्पसंख्यक भी उतने ही अनमोल हैं.
फ़वाद हुसैन ने कहा कि यह मोदी का इंडिया का नहीं है जहां अल्पसंख्यकों को तबाह किया जाता है, यह इमरान ख़ान का नया पाकिस्तान है जहां हमारे झंडे का सफ़ेद रंग भी उतनी ही क़ीमती हैं. उम्मीद करता हूं कि जब वहां अल्पसंख्यकों के अधिकार की बात आएगी तो आप भी उतनी ही तत्परता से कार्रवाई करेंगी."
पाकिस्तान में दो नाबालिग हिंदू लड़कियों का कथित तौर पर अपहरण कर जबरन धर्म परिवर्तन कराए जाने के विरोध में हिंदू समुदाय ने गुरुवार को धरना प्रदर्शन किया था. घटना सिंध प्रांत के घोटकी ज़िले के दहारकी तालुका में होली के दिन हुई.
अनुसूचित जाति के हिंदू नेताओं ने आरोप लगाया है कि दो नाबालिग बहनों का होली के दिन मुस्लिम समुदाय के कोहबर और मलिक जनजाति के लोगों ने अपहरण कर लिया.
हालांकि इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो गया जिसमें दो लड़कियां इस्लाम अपनाने का दावा करती हुई कह रही हैं कि हमने अपनी मर्जी से इस्लाम को अपनाया है.
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इस पूरे मसले पर भारत में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू ने ट्वीट कर इस अपहरण पर अपनी प्रतिक्रिया दी है.
उन्होंने अपने ट्वीट में इस वारदात को शर्मनाक बताते हुए प्रधानमंत्री इमरान ख़ान से पूछा कि आपका नया पाकिस्तान कहां है?
यह है नया पाकिस्तान...

सबही नचावत राम गुसाई

कल तक जो कांग्रेस सपना के सपने में आंखों का काजल ढूंढ रही थी उसी सपना ने कांग्रेस से टिकट ना पाने पर यह कह दिया कि उसने कांग्रेस ज्वाइन ही नहीं किया, पर उस कांग्रेसी सदस्यता फॉर्म का उन्हें ख्याल नहीं रहा जो उनके दसख्वत के साथ सोशल मीडिया पर धूम मचा रहा, यह राजनीति किसके ना होश उड़ा दे, चुनाव लड़ने का ऑफर मिलते ही दिमाग सांतवे आसमान पर और आंखें फैल कर बावन इंच की हो जाती है। दिल सतपुड़ा के पहाड़ों परिंदा होकर उड़ने लगता है। पर लोगों को यह पता नहीं होता कि राजनीति में आने पर ही एक दिन जेल की हवा भी खानी पड़ती है...क्या कहे सबही नचावत राम गुसाई...