#स्त्री_और_पुरुष_के_रिश्ते_सिर्फ_प्यार_से_ही_टिकाऊं_
#रह #सकते_हैं
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एक जवान औरत और मर्द के बीच नि:स्वार्थ प्रेम जैसा कोई रिश्ता नहीं होता, यह रिश्ता तो उम्र के पचासवें बसंत से शुरू होता है जहां जिस्म नहीं, भावनाएं अहम हो जाती हैं, एक-दूजे का इंसान ख्याल रखने लगता है। यह भी वहीं होता है जहां जिंदगी के पच्चीस-तीस साल साथ गुजर कर दोनों जोड़े एक साथ पचासवें बसंत में कदम रखे हों। जिन दो जवां दिलों में नि:स्वार्थ प्रेम की बात की जाती है उनमें किसी कारणवश एक दूसरे का साथ न मिल पाने से नि:स्वार्थ प्रेम की बातें होती हैं। ठीक अंगूर खट्टे हैं वाली कहावत की तरह। अगर जवां दिलों में प्यार परवान चढ़ता है तो समाज की सारी बंदिशें तोड़ प्रेमी सभी हदें लांघ जाते हैं बिना आगा-पीछा सोचे। स्त्री और पुरुष का मिलन आग और घी का मिलन है यह बात पुरुष महिलाएं
जानते हैं। सभ्यता की मांग यह कि सभी अपने जज्बात सभी के साथ नहीं शेयर करते। डरते हैं कि क्या पता मुंह की खानी पड़े। जहां प्रेम प्रगाढ़ हो जाता है तो क्या शादीशुदा क्या क्वांरे परिणाम एक जैसा ही निकलता है वे सबकुछ भूल एक-दूसरे के हो जाते हैं। आपसी रिश्तों का सामंजस्य न बैठा पाने की वजह से आज रिश्ते दरक रहे हैं, अपना मूल्य खोते जा रहे हैं, परिवार विघटन के कगार पर खड़ा है।
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जिन लोगों को अपने परिवार अपने जिम्मेदारियों का एहसास है वे परिवार के लिए जी रहे हैं, उन्हीं में अपनी खुशियां तलाश रहे हैं। बच्चों की सफलता, पत्नी के चेहरे की हंसी में ही उन्हें संतोष मिल रहा। इन तमाम कारणों के लिए पति और पत्नी दोनों जिम्मेदार हैं। औरत और मर्द के रिश्ते में बड़ी साफगोई से बताना चाहता हूं कि दोनों का एक-दूसरे की ओर आकर्षित होना बेहद नेचुरल, बहुत प्राकृतिक है। मनुष्य ने अपनी सभ्यता विकसित कर इसे रिश्तों का जामा पहनाया है। इसकी हदें तय कर दी हैं। इस पर सामाजिक ताना-बाना बुना है। पर यह हदें जब टूटती हैं तो समाज में इसे लेकर कड़ी प्रतिक्रिया होती है जो काफी हद तक सही भी है। लेकिन यह रिश्ता समाज का नहीं औरत और मर्द का है, इंसान का इंसान से है, दिल का दिल से है इसे प्यार से सींचकर ही व्यवस्थित रखा जा सकता है। प्यार से ही यह उर्वरक रहेगा, प्यार ही इसके लिए खाद पानी है। प्यार नहीं मिला तो यह मुरझा सकता है, टूट सकता है, सूख सकता है। इसलिए हर स्त्री और पुरुष को जो परिवार बनकर साथ रह रहे हैं इसे प्यार से सींचें....रहिमन धागा प्रेम का मत तोड़ो चटकाय....🙏
#रह #सकते_हैं
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एक जवान औरत और मर्द के बीच नि:स्वार्थ प्रेम जैसा कोई रिश्ता नहीं होता, यह रिश्ता तो उम्र के पचासवें बसंत से शुरू होता है जहां जिस्म नहीं, भावनाएं अहम हो जाती हैं, एक-दूजे का इंसान ख्याल रखने लगता है। यह भी वहीं होता है जहां जिंदगी के पच्चीस-तीस साल साथ गुजर कर दोनों जोड़े एक साथ पचासवें बसंत में कदम रखे हों। जिन दो जवां दिलों में नि:स्वार्थ प्रेम की बात की जाती है उनमें किसी कारणवश एक दूसरे का साथ न मिल पाने से नि:स्वार्थ प्रेम की बातें होती हैं। ठीक अंगूर खट्टे हैं वाली कहावत की तरह। अगर जवां दिलों में प्यार परवान चढ़ता है तो समाज की सारी बंदिशें तोड़ प्रेमी सभी हदें लांघ जाते हैं बिना आगा-पीछा सोचे। स्त्री और पुरुष का मिलन आग और घी का मिलन है यह बात पुरुष महिलाएं
जानते हैं। सभ्यता की मांग यह कि सभी अपने जज्बात सभी के साथ नहीं शेयर करते। डरते हैं कि क्या पता मुंह की खानी पड़े। जहां प्रेम प्रगाढ़ हो जाता है तो क्या शादीशुदा क्या क्वांरे परिणाम एक जैसा ही निकलता है वे सबकुछ भूल एक-दूसरे के हो जाते हैं। आपसी रिश्तों का सामंजस्य न बैठा पाने की वजह से आज रिश्ते दरक रहे हैं, अपना मूल्य खोते जा रहे हैं, परिवार विघटन के कगार पर खड़ा है।
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जिन लोगों को अपने परिवार अपने जिम्मेदारियों का एहसास है वे परिवार के लिए जी रहे हैं, उन्हीं में अपनी खुशियां तलाश रहे हैं। बच्चों की सफलता, पत्नी के चेहरे की हंसी में ही उन्हें संतोष मिल रहा। इन तमाम कारणों के लिए पति और पत्नी दोनों जिम्मेदार हैं। औरत और मर्द के रिश्ते में बड़ी साफगोई से बताना चाहता हूं कि दोनों का एक-दूसरे की ओर आकर्षित होना बेहद नेचुरल, बहुत प्राकृतिक है। मनुष्य ने अपनी सभ्यता विकसित कर इसे रिश्तों का जामा पहनाया है। इसकी हदें तय कर दी हैं। इस पर सामाजिक ताना-बाना बुना है। पर यह हदें जब टूटती हैं तो समाज में इसे लेकर कड़ी प्रतिक्रिया होती है जो काफी हद तक सही भी है। लेकिन यह रिश्ता समाज का नहीं औरत और मर्द का है, इंसान का इंसान से है, दिल का दिल से है इसे प्यार से सींचकर ही व्यवस्थित रखा जा सकता है। प्यार से ही यह उर्वरक रहेगा, प्यार ही इसके लिए खाद पानी है। प्यार नहीं मिला तो यह मुरझा सकता है, टूट सकता है, सूख सकता है। इसलिए हर स्त्री और पुरुष को जो परिवार बनकर साथ रह रहे हैं इसे प्यार से सींचें....रहिमन धागा प्रेम का मत तोड़ो चटकाय....🙏